ट्रेन में कितने गियर होते है? ट्रेन कितना माइलेज देती है? और एक ट्रेन में कितने पहिये होते है?

नमस्कार दोस्तों, आप सबका हमारे ब्लॉग पर स्वागत है,  आज इस पोस्ट में मै बताने वाला हु की एक ट्रेन में कितने गियर होते है, ट्रेन का माइलेज कितना होता है. तो देर किस बात की चलिए शुरू करते है –

ऐसा तो हम सभी जानते है की दुनिया में तेज़ चलने वाली उसके साथ साथ हर एक इंसान चाहे वो गरीब हो या अमीर सफर कर सके तो वो है रेलगाड़ी, जो तेज़ रफ़्तार से हमारे और आपके सामने से रोज अपनी पटरी पर दौड़ती है. चाहे तो रेल गाडी हो या माल गाड़ी, रास्ता कैसा भी हो मेरा मतलब है पहाड़ से, वो पूरे मन से सभी डब्बो को आसानी से  खींचती जाती है।

जब ट्रेन पहाड़ पर आसानी से चढ़ जाती है तब यहाँ पर वक सवाल हमारे और आपके मन में आने लगता है की एक ट्रेन जो सीधे पटरियों पर भी दौड़ती है, और ऊँचे पहाड़ो पर भी बड़े ही शान से दौड़ती है, लेकिन कैसे, क्या ट्रेन में  कोई गियर बॉक्स होता है जैसे हमारी गाड़ियों में होता है, अगर होते है तो कितने गियर होते है वगैरा वगैरा।

तो आज हम आपके इन्ही सवाल का जवाब देने वाला हूँ की आखिर एक ट्रैन में कुल कितने गियर होते है और इसका माइलेज कितना है।

ट्रेन में कुल कितनी गियर होते है – Ek Train Me Kull Kitne Gear Hote Hai 

जहा तक मै जानता हु बहुत से लोगो को ये नहीं पता है की ट्रेन में कितने गियर होते है, इनमे से कुछ मेरे दोस्त भी है जिन्हे ये भी नहीं पता की ट्रेन कितना माइलेज देती है।

गोविंद बल्लभ पंत इंजीनियरिंग कॉलेज, दिल्ली से ग्रेजुएट इलेक्ट्रिकल इंजीनियर श्री अजय कुमार निगम  मुम्बई डिवीजन मध्यरेलवे में सीनियर लोकोपायलट/मोटरमैन हैं. श्री निगम सर ने एक इंटरव्यू में इस सवाल बहुत ही टेक्निकली जवाब दिए थे, इसे मै आपको एक सरल भाषा में समझाने की कोसिस करूँगा।

श्री निगम सर का कहना है की ट्रेन में गियर तो होता है लेकिन ये आम गाड़ियों के गियर से बिलकुल अलग होता है जिसे हमें बार बार बदलने की बिलकुल भी ज़रुरत नहीं पड़ती है ये एक महगी कार के गियर के सामान होता है जहा आप बस गाड़ी चलाते जाओ वो रोड के हिसाब से अपने आप गियर को बदलती रहती है. आपको कुछ भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं होती है।

इतना सब पढ़ने के बाद हमारे दिमाग में बने सवाल कि ” ट्रेन में कितने गियर होते है ” इसका जवाब तो मिल गया है-

ट्रेन में आटोमेटिक गियर होते है और वो स्पीड के साथ साथ अपने आप बदलते रहते है

 

ट्रेन कितना माइलेज देती है या 100 किलोमीटर दूरी चलने में कितने लीटर डीजल का खर्चा होता है

भारतीय रेल अपने सभी रेल मार्ग को इलेक्ट्रिक कर रहा है. ट्रेनों को इलेक्ट्रिक करने से रेलवे को हर साल करोड़ो लीटर डीजल की बचत होगी लेकिन अभी ऐसे बहुत सी ट्रेन मार्ग है जहा अब भी डीजल इंजन चलाया जा रहा है इसी वजह से हमारे दिमाग में  ये सवाल भी घूम घूम कर आता है की एक ट्रेन कितना माइलेज देती है, क्या वो हमारे कारो के जैसा ही डीजल खाती है या एक बड़े ट्रक के बराबर डीजल खाती है या फिर डीजल टैंक कितने लीटर का होता है और इसका एवरेज कैसे निकाला जाता है।

आपको हम बता दे की भारतीय रेल के इंजनों में तीन तरह की डीजल की टंकिया होती है जिनमे पहली आती है 5000 लीटर, दूसरी 5500 लीटर और तीसरी 6000 लीटर की होती है।

ट्रेन कितना माइलेज देती है ( Train’s  Mileage )

ट्रेन कितना माइलेज देती है

 

हम सभी को पता है की गाड़ियों में जितना ज्यादा लोड होता है, गाड़ी उतना ही कम एवरेज देती है चाहे वो ट्रेन का इंजन हो या किसी ट्रक का ये बाते हर छोटी बड़ी इंजन पर लागू होता है। ऐसा ही कुछ भारतीय रेल के इंजन में भी है. डीजल इंजन में भी प्रति किलोमीटर का एवरेज गाड़ी की लोड के हिसाब से ही तय होता है।  अगर गाड़ी 24 डिब्बे की है तो श्री निगम के मुताबिक तो लगभग 6 लीटर डीजल में 1 किलोमीटर का एवरेज आता है।  इसके अलावा अगर ट्रेन 12 डिब्बों वाली पैसेंजर ट्रैन है तो उसमे भी लगभग 6 लीटर डीजल में 1 किलोमीटर का एवरेज आता है.

हमारे दिमाग में एक सवाल आया होगा की 24 डिब्बों  और 12 डिब्बों वाली ट्रैन दोनों एक सामान डीजल क्यों खाती है तो मेरा जवाब है की जो पैसेंजर ट्रैन हमेशा हर एक स्टेशन पर रुकते हुई जाती है इस वजह से ट्रैन में ब्रेक लगाने और फिर दुबारा स्पीड बढ़ाने में काफी डीजल खर्च हो जाता है।

इसके मुकाबले जो बड़ी बड़ी ट्रेनें है जैसे एक्सप्रेस ट्रैन, ये पैसेंजर ट्रैन की मुकाबले काफी कम स्टेशन पर रूकती है और ये दुसरे ट्रेनों के मुकाबले काफी बड़ी और वजन भी ज्यादा उठाती है लेकिन इनका डीजल खाने का एवरेज लगभग 4.50  लीटर में 1 किलोमीटर का एवरेज आता है।

राजधानी ट्रैन का माइलेज भी इसी तरह का होगा क्योकि वो वजन तो लगभग एक सा ही उठाती है बस फर्क इतना रहता है की ये पैसेंजर ट्रेनों के जैसा हर जगह नहीं रूकती है।

ट्रेन इंजन स्टार्ट होने में कितना डीजल खाता है

ट्रेन इंजन स्टार्ट होने में कितना डीजल खाता है

अक्सर लोगो को ऐसा कहते आपने भी सुना होगा की बंद इंजन को स्टार्ट करने में चालिश से पचास लीटर डीजल खर्च हो जाता है लेकिन मैं आपको बता दू की किसी भी ट्रैन को स्टार्ट करने के दौरान कम से कम 25 लीटर डीजल की ज़रुरत पड़ती है अगर मै कहू की 25 लीटर डीजल खाती है ट्रेन एक बार स्टार्ट होने के लिए तो कोई गुरेज़ नहीं है।

सायद इसी वजह से स्टेशन पर ट्रेन काफी देर तक खड़ी होने के बाद भी इंजन को बंद नहीं करते है।

ट्रेन का इंजन कैसे चालु होता है?

जहा तक मैंने देखा और पढ़ा है ट्रेन का इंजन भी ठीक हमारे कार की तरह ही स्टार्ट होती है। उसमे ऐसा कुछ अलग नहीं होता है।

इलेक्ट्रिक ट्रेन में कैसा इंजन होता है?

श्री अजय कुमार निगम बताते है की भारतीय रेल में चलने वाली ट्रेनों को खींचने  के लिए दो तरह के इंजन उपयोग में लाये में लाये जाते है- पहला है डीजल इंजन दूसरा है इलेक्ट्रिक इंजन।

इलेक्ट्रिक इंजन को लोकोमोटिव इंजन भी कहा जाता है, लोकोमोटिव का मतलब है की वहा कोई डीजल इंजन और न ही कोई पेट्रोल इंजन होता है वहा इंजन के ऊपर यानी हमारे और आपके सिर के ऊपर बनी लोहे की तार में करंट रहता है और वही तार इंजन के एक्सक्लो पर लगी ट्रैक्शन मोटरो को सप्लाई कर दी जाती है फिर इंजन में लगे स्पीड कंट्रोलर की मदद से इलेक्ट्रिक स्पीड को कण्ट्रोल किया जाता है इसी वजह से पायलट यानी ट्रैन का ड्राइवर आसानी से कही भी ब्रेक लगा कर गाड़ी को रोक सकता है और एक्सेलेटर के द्वारा स्पीड भी घटा बढ़ा सकता है।

इलेक्ट्रिक इंजन में कितने गियर होते है?

ज्यादातर जितने भी लोकोमोटिव यानी इलेक्ट्रिक इंजन में मुखतया 6 एक्सेल लगे होते है, जिसमे सभी पर बड़े बड़े ट्रैक्शन मोटर लगे हुए होते है। छः ट्रैक्शन मोटरों के छः पिनियन गियर और फिर छः बुल गियर, इस तरह ट्रैक्शन संबंधित कार्य के लिए एक लोकोमोटिव में बारह गियर होते हैं, ये गियर हमारे और आपके गाड़ियों में लगे मोटर्स  बिलकुल अलग होते है।  इसमें प्रत्येक एक्सेल के ऊपर ट्रैक्शन मोटर की आर्मेचर ड्राइव सॉफ्ट के साथ साथ इलेक्ट्रिक इंजन अगले भाग में गियर केस के अंदर तेल में डूबे रहते है

आज से कुछ दिन पहले जब कोई भी ट्रेन चाहे वो माल गाड़ी ही क्यों न हो, बहुत दिन तक ट्रेन का इंजन बंद नहीं जाता है चाहे ट्रेन कितना देर तक ही क्यों न खड़ी रहे। जिसकी वजह से रेल विभाग को नुक्सान उठाना पड़ रहा था। अपने दिए गए इंटरव्यू में संजीव सर बताते है की

इंजन न बंद करने के अनेको कारण थे जिसने हमने नीचे लिख दिया है –

  1. पहला कारण इसलिए था कि जब हम इंजन को बंद करते है उसके बाद जब स्टार्ट करेंगे तब सिर्फ इंजन चालु करने के लिए इंजन को 25 लीटर डीजल की आवश्कता पड़ती है।
  2. दूसरा कारण बताया गया कि कही ऐसा न हो जब हम इंजन को बंद कर दे तब उसके बाद वो चाळु ही न हो, यानी इंजन में कुछ अपने आप खराबी न आ जाए और इसके वजह से बे वजह किसी को परेशान न होना पड़े।
  3. अगर डीजल लोकोमोटिव के इंजन बंद कर दिया जाए तो ब्रेक पाइप का दबाव कम हो जाता है और फिर से दबाव बनाने के लिए अधिक समय लगता है
  4. किसी भी बंद डीजल इंजन को अच्छे से चालु होने के लिए लगभग 10 से 15 मिनट लगते है।
  5. कम्प्रेसर को चलाने के लिए इंजन को बंद नहीं करना चाइये क्योकि यह इंजन के साथ जुड़ा होता है
  6. किसी भी डीजल इंजन में आमतौर से 16 सिलेंडर होते है और हर एक सिलेंडर की ताकत 200 HP की होती है लेकिन ये आकार में काफी बड़ा होता है इसलिए इंजन चालु करने के बाद पूरे इंजन में ताप बनाने के लिए अधिक समय लगता है और ये काफी मुश्किल भी होता है।

 

लेकिन अभी कुछ दिन पहले भारत सरकार रेल मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया है की अगर कोई भी मालगाड़ी चाहे वो डीजल हो या इलेक्ट्रिक, अगर 10 से 12 घंटे तक स्टेशन पर खड़ी रहती है तो तब उस टाइम इंजन बंद करना अनिवार्य है, यानी इंजन को बंद कर दिया जाएगा चाहे इंजन में कुछ भी परेशानी क्यों न हो।

 

इसके बाद भी लम्बे समय तक चलने के बावज़ूद डीजल लोकोमोटिव इंजन बंद नहीं होते है।

Conclusion:

आशा करता हु की आपको जो हमने आपको बताया है कि ट्रेन में कितने गियर होते है, ट्रेन कितना माइलेज देती है या फिर ट्रेन कितना डीजल खाती है, ज़रूर समझ में आया होगा। अगर आपके पास हमारे इस पोस्ट या वेबसाइट को लेकर कोई सुझाव  हो तो नीचे कमेंट में बिना किसी झिझक के बोल सकते है, या फिर हमें मेल कर सकते है।

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